HARSH SHARMA'S POETRY

सफर जिंदगी का,,,
बहुत कुछ याद रह जाता है इतना कि जितना याद रखना जरूरी न था, बहुत कुछ सीख गए हैं इतना कि जितना सीख जाना जरूरी न था..
हम बस एक तरफा रास्तों से वाकिफ़ हैं, वापिसी के रास्तों की कोई खबर ही नही थी, इसलिए एक नई शुरुआत की कहीं कोई गुंजाइश बची ही नही..
फिर भी मैं एक नई शुरुआत करना चाहता हूं फिर उसी दुनिया से वाकिफ होना चाहता हूं कुछ अपनों से दूर और कुछ को अपना बनाना चाहता हूं
ये जिंदगी की भागदौड़ में मै खुद को फिर उसी तरह मजबूत खड़ा करते हुए देखता हूं अपनी जिंदगी में फिर एक बार बचपन की यादों को महसूस करना चाहता हूं|

HARSH SHARMA